मौनी अमावस्या के अमृत स्नान के दौरान प्रयागराज महाकुंभ में बुधवार करीब 1-2 बजे भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में करीब 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। डीआईजी महाकुंभ वैभव कृष्णा ने इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि यह हादसा कैसे हुआ।
अखाड़ा मार्ग पर जमा हुई भीड़
डीआईजी महाकुंभ वैभव कृष्णा ने बताया कि महाकुंभ में रात 1-2 बजे के बीच हुई भगदड़ में 30 लोगों की मौत हो गई है। 25 लोगों की पहचान हो गई है और बाकी 5 की पहचान की जा रही है। डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया, 'ब्रह्म मुहूर्त से पहले रात 1 से 2 बजे के बीच अखाड़ा मार्ग पर भारी भीड़ जमा हो गई।
भीड़ ने तोड़ डाले बैरिकेड
इस भीड़ के कारण दूसरी तरफ लगे बैरिकेड टूट गए और भीड़ ने दूसरी तरफ ब्रह्म मुहूर्त की पवित्र डुबकी लगाने के लिए इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को कुचल दिया। करीब 90 लोगों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन दुर्भाग्य से 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इन 30 में से 25 की पहचान हो गई है और बाकी की पहचान होनी बाकी है। इनमें कर्नाटक के 4, असम का 1, गुजरात का 1 व्यक्ति शामिल है...36 लोगों का स्थानीय मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। फिलहाल स्थिति सामान्य है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी महामंडलेश्वर, संतों, अखाड़ों से कुछ देरी से पवित्र डुबकी लगाने का अनुरोध किया है...अखाड़ों का अमृत स्नान सुरक्षित रूप से संपन्न हो गया है।
VVIP मूवमेंट की व्यवस्था खत्म
डीआईजी ने बताआ कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेले प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी किया गया है। हालांकि, उन्होंने बताया कि उन्होंने कहा कि 29 तारीख का कोई VVIP मूवमेंट नहीं था। आगामी बड़े पर्व या स्नान पर कोई VVIP मूवमेंट नहीं होगा। आपको बता दें कि 13 जनवरी से शुरू हुए महाकुंभ में अब तक करीब करीब 20 करोड़ लोग गंगा में डुबकी लगा चुके हैं। वहीं बुधवार को मौनी अमावस्या पर दोपहर 2 बजे तक 5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। संगम क्षेत्र में हालात सामान्य हो गए हैं, लेकिन महाकुंभ में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वहां मौजूद है।
Kanwal Ziai, born H. S. Datta in Sialkot in 1927, was an Urdu and Hindi poet whose ghazals explored identity, society, hope and human relationships. From Sialkot to Dehradun, his remarkable literary journey crossed borders, languages and generations.
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